दरअसल, पहले मैं ज़्यादा नमस्ते नहीं कहता था।
चूंकि मैंने अभियान के दौरान लगातार नमस्ते कहा, इसलिए मुझमें नमस्ते कहने की अच्छी आदत विकसित हो गई।
मेरी अभिव्यक्ति, जो हमेशा आंसुओं से भरी रहती थी, अब एक उज्ज्वल, मुस्कुराते चेहरे में बदल रही है। 
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